मिथला दर्सन !: Mithla Darsan
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जगत जननी सीता, मिथिला क धरोहर

Written By Unknown on Friday, 21 March 2014 | 18:41

जगत जननी सीता क मिथिला क धरोहर आओर संस्कृति क प्रतीक मानल जैत अछि। सीता रामायण आ रामकथा पर आधारित आन रामायण ग्रंथ, जेना  रामचरितमानस, क मुख्य पात्र थिक। सीता मिथिलाक राजा जनकक ज्येष्ठ पुत्री छल। हिनक विवाह अयोध्या क राजा दशरथक ज्येष्ठ पुत्र राम सँ स्वयंवर म शिवधनुषक भंग केला क उपरांत भेल छल। हिनक स्त्री आ पतिव्रता धर्म क कारण हिनक नाम आदर सँ लेल जैत अछि। त्रेतायुग म हिनका सौभाग्य क देवी लक्ष्मी क अवतार मानल जैत अछि।
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रामायणक अनुसार मिथिलाक राजा जनकक खेत म हल जोतैत समय एकटा पेटी सँ भेटल। हल क संस्कृत म 'सीत' कहैय क कारण हिनक नाम सीता पडल। राजा जनकक पुत्री हेवा क कारण हिनका जानकी आ जनकसुता कहल जैत अछि। मिथिला क राजकुमारी हेवा क कारण मैथिली नाम सँ सेहो प्रसिद्ध अछि।
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महाराज जनक सीता स्वयंवरक घोषणा केलक आउर ऋषि विश्वामित्रक उपस्थिति हेतु निमंत्रण भेजल गेल। आश्रम म राम आ लक्ष्मण उपस्थित क कारण हुनको मिथिपलपुरी साथ ल एला। महाराज जनक जी उपस्थित ऋषिमुनि क आशिर्वाद सँ स्वयंवरक लेल शिवधनुष उठाबैय क नियम क घोषणा केलक। श्रीरामजी धनुष क उठेलक आ ओकरा तोरलक। अय तरहे सीता क विवाह श्रीरामजी सँ निश्चय भेल।
साथे ऊर्मिला क विवाह लक्ष्मण सँ,  मांडवी क भरत सँ आ श्रुतिकीर्ती क शत्रुघ्न सँ निश्चय भेल। पाविवाहोपरांत सीता अयोध्या एलिह।

श्री विद्यापति भारतीय साहित्यक महान कवि

 

पूरा नाम विद्यापति ठाकुर
दोसर नाम महाकवि कोकिल
जन्म सन् 1350 सँ 1374 क मध्य
जन्म भूमि बिसपी गाँव, मधुबनी ज़िला, बिहार
मृत्यु सन् 1440 सँ 1448 क मध्य
अविभावक श्री गणपति ठाकुर आउर श्रीमती हाँसिनी देवी
श्री विद्यापति भारतीय साहित्यक भक्ति परंपरा क प्रमुख स्तंभ म सँ एकटा आओर मैथिली के सर्वोपरि कवि क रूप म जानल जैत अछि। हिनक काव्य म मध्यकालीन मैथिली भाषा क स्वरुपक दर्शन कैल जा सकैत अछि। हिनका वैष्णव आओर शिव (उगना) भक्तिक सेतु क रुप म स्वीकार कैल गेल अछि। मिथिला क लोग क 'देसिल बयना सब जन मिट्ठा' क सूत्र द उत्तरी-बिहार म लोकभाषा क जनचेतनाक जीवित करैय क महती प्रयास केलक।
मिथिलांचल क लोकव्यवहार म गावै वला गीत म एखनो श्री विद्यापति क श्रृंगार आउर भक्ति रस म पगी रचनायें जीवित अछि। पदावली आ कीर्तिलता हिनक अमर रचना अछि।
प्रमुख रचना
कीर्तिलता, मणिमंजरा नाटिका, गंगावाक्यावली, भूपरिक्रमा आदि।
महाकवि विद्यापति मैथिली, संस्कृत, अबहट्ठ आदि अनेको भाषा क प्रकाण्ड पंडित छल। कर्मकाण्ड होय या धर्म, दर्शन होय या न्याय, सौन्दर्य शास्र होय या भक्ति रचना, विरह व्यथा होय या अभिसार, राजा क कृतित्व गान होय या सामान्य जनता क लेल गया म पिण्डदान, सभटा क्षेत्र म विद्यापति अपन कालजयी रचना क बदौलत जानल जायत अछि।
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